बाबा केदार के दर पर कैलाश खेर, यात्रा की ब्रांडिंग
विपिन बनियाल
-कैलाश खेर उन भाग्यशाली श्रद्धालुओं में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने चार धाम यात्रा शुरू होने के एक सप्ताह बाद ही श्री केदारनाथ धाम मेें पूजा-अर्चना कर ली है। कैलाश खेर की गायकी में केदार बाबा से उनका संबंध समय-समय पर झलकता रहा है। केदार पुरी से कैलाश खेर ने एक तरह से उत्तराखंड की चार धाम यात्रा की ब्रांडिंग कर दी हैै। वैसे, अभी ज्यादा समय नहीं हुआ, जबकि कैलाश खेर ने डीएफओ डायरी, फायर वारियर्स फिल्म का गाना गाया था, जिसके बोल थे-स्वागत, स्वागत मेरो पहाड़। यह गाना भी उत्तराखंड की ब्रांडिंग करने वाला रहा था।
कैलाश खेर की गायकी की रेंज जबरदस्त है। उनके आह्वान दमदार होते हैं। इस गीत में कैलाश खेर की गायकी जितनी उम्दा है, इस गीत का फिल्मांकन उतना ही श्रेष्ठ है। पहाड़, खास तौर पर कुमाऊं क्षेत्र की खूबसूरती को शानदार तरीके से पेश किया गया है। पार्श्व में चलती कैलाश खेर की आवाज और सामने आते खूबसूरत पहाड़ के नजारे सोने पे सुहागा जैसे हैं।
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के आकाश में कैलाश खेर एक चमकता सितारा है। कैलाश खेर जब संघर्ष के दौर में थे, तो उस कठिन समय में देवभूमि उत्तराखंड ही उनके लिए बड़ा सहारा बनी थी। आध्यात्मिक नगरी ऋषिकेश से ऊर्जा पाकर कैलाश खेर निकले और फिर संगीत की दुनिया में छा गए। वर्ष 2013 की आपदा के बाद जब केदारनाथ पुनर्निर्माण की बात चली और यात्रा के प्रमोेशन पर काम हुआ, तो जय-जय केदारा प्रोजेक्ट के साथ कैलाश खेर सामने आए। इस प्रोजेक्ट के साथ विवाद भी जुड़ा। मनमाने भुगतान को लेकर कैलाश खेर निशाने पर आए और सरकारी सिस्टम पर भी अंगुली उठी, लेकिन शिवभक्ति से जुड़ी उनकी रचना के सिर्फ कला पक्ष की बात की जाए, तो यह बेजोड़ थी।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डा रमेश पोखरियाल निशंक की कहानी पर बनी फिल्म मेजर निराला के लिए वर्ष 2018 में भी कैलाश खेर ने एक गढ़वाली गाना गाया-कदगा कमयू मुनाफा, कदगा कदमू घाटा। इसका गीत-संगीत नरेंद्र सिंह नेगी का था। डीएफओ डायरी, फायर वारियर्स फिल्म के लिए इस गीत को कैलाश खेर की आवाज नसीब होना सुखद है।
इस फिल्म के लेखक/निर्देशक देहरादून निवासी महेश भट्ट के अनुसार-यह गीत पहले इस फिल्म का हिस्सा नहीं था। फिल्म से जुडे़ लोगों के पास कैलाश खेर का यह गीत पहले से उपलब्ध था, जिसके फिल्म के साथ जुड़ाव की संभावना देखते हुए इस पर काम किया गया। यह गाना पहाड़ के पर्यटन की ब्रांडिंग करता है। फिल्म में यह गीत कुछ छात्राओं पर फिल्माया गया है, जो कि कुमाऊं में उस स्थान की तलाश में निकलती हैं, जहां पर रवींद्रनाथ टैगौर ने गीतांजलि की रचना की थी। गीत को विनय कोचर ने लिखा है। प्राथमिक धुन भी उन्हीं की बनाई हुई है, लेकिन पहाड़ के खास संदर्भों में अमित वी कपूर ने नए सिरे से इसके संगीत पर काम किया है। महेश भट्ट इस बात से बेहद खुश हैं कि कैलाश खेर की आवाज वाला गीत फिल्म का हिस्सा बना है।