फिल्म नीति-2024 औैर उत्तराखंड के आंचलिक सिनेमा में बदलाव की पहल!
उदंकार न्यूज
देहरादूून। उत्तराखंडी सिनेमा के उतार-चढ़ाव भरे सफर को लेकर अक्सर बातें होती रहती हैं। अब जबकि, 43 वर्ष बीत चुके हैं, तब इस फिल्मी सफर पर नए सिरे से बहस चल निकली है। उत्तराखंड फिल्म नीति-2024 की पृष्ठभूमि में ये सवाल अक्सर उठ रहे हैं कि राज्य की फिल्म इंडस्ट्री में क्या बदलाव आ रहे हैं।
राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में दिल्ली की दि हाई हिलर्स ग्रुप ने सर्वे आॅडिटोरियम में एक गोष्ठी आयोजित की। गोष्ठी में उत्तराखंडी फिल्म इंडस्ट्री के नामचीन चेहरों की मौजूदगी में विचारोत्तेजक चर्चा हुई। प्रख्यात अभिनेता बलराज नेगी, निर्देशक अनुज जोशी, सुनील बडोनी के साथ प्रख्यात गीतकार-साहित्यकार मदन मोहन डुकलान ने अपना नजरिया सामने रखा। मंच साझा करते हुए उनके साथ इस गोष्ठी का हिस्सा बनना मेरे लिए सुखद औैर आनंददायक रहा।
प्रख्यात अभिनेता बलराज नेगी की जुबानी यह सुनना दिलचस्प रहा कि किस तरह से घरजवैं की शूटिंग हुई। अतीत औैर मौजूदा दौर में फिल्मों के निर्माण की तकनीक पर बदलाव, निर्माताओं की तकलीफ पर उनके विचार महत्वपूर्ण रहे। कारा एक प्रथा और घस्यारी के निर्देशक सुनील बडोनी ने अपने करियर के बारे में दिलचस्प बातें शेयर की।
फिल्म निर्देशक अनुज जोशी का फोकस अच्छे सब्जेक्ट को चुनने औैर उस पर ही फिल्म बनाने को लेकर केंद्रित रहा। अपने गीतों और अभिनय के बूते कई फिल्मों में अच्छा काम करने वाले मदन मोहन डुकलान के पास कहने-सुनने के लिए बेशुमार बातें थीं। उन्होंने उसी अनुरूप कई तरह की जानकारियां दीं और सूचनाएं भी एकत्रित कीं। संचालन में गंभीर जयाडा ने भी सहयोग किया।
इस संगोष्ठी का लब्बोलुआब ये ही रहा कि सरकार ने अपने स्तर पर फिल्म निर्माताओं के लिए सब्सिडी की पहल कर अच्छा कदम उठाया है। अब इसका बेहतर इस्तेमाल करते हुए बेहतर फिल्में बनाने की जिम्मेदारी फिल्म निर्माताओं की ही है। इस क्रम में प्रख्यात रंगकर्मी श्रीश डोभाल का निर्माताओं के लिए छोटे-छोटे प्रशिक्षण केंद्र आयोेजित किए जाने के सुझाव का सभी ने स्वागत किया। महाराष्ट्र जैसे राज्य की तरह उत्तराखंड में भी थियेटरों में अनिवार्य रूप से आंचलिक फिल्म चलाने की व्यवस्था का भी सुझाव दिया गया, जिसे सभी ने उपयुक्त माना।
