नगर निकाय हो या पंचायत चुनाव, हर जगह बजा भाजपा का डंका
विपिन बनियाल
-भाजपा के कुशल चुनाव प्रबंधन का वर्ष 2025 भी गवाह बना। गांव हो या शहर, जहां भी चुनाव हुए, बाजी भाजपा के हाथ ही लगी। नगर निकायों के चुनाव में तो भाजपा ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसे आज तक के निकाय चुनाव इतिहास में सर्वश्रेष्ठ माना गया। नगर निगमों के महापौर की 11 सीटों में से भाजपा ने दस सीटें झटक कर अपनी श्रेष्ठता को साबित किया। वहीं, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भी पार्टी का प्रदर्शन धमाकेदार रहा। सर्वाधिक प्रतिष्ठित जिला पंचायत अध्यक्षों की 12 सीटों में से 11 सीटें जीतकर भाजपा ने साफ संदेश दे दिया कि उत्तराखंड में उससे शक्तिशाली फिलहाल कोई नहीं है।
वर्ष 2025 में ऐसा संयोग बना कि नगर निकायों के साथ ही त्रिस्तरीय पंचायत केे चुनाव भी करा लिए गए। वर्ष की शुरूआत ही नगर निकाय चुनाव सेे हुई। भाजपा ने असाधारण प्रदर्शन किया। नगर निकाय चुनाव में भाजपा की जीत को कई मायनों में खास माना गया। पहला, कुल 11 नगर निगमों के महापौर चुने जाने थे। इसमें से दस भाजपा केे चुने गए। नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्षों के 89 पदों के लिए चुनाव हुए थे। इनमें से 30 से ज्यादा जगहों पर भाजपा के अध्यक्ष जीतकर आए। भाजपा की नगर निकायों में जीत कुछ और कारणों से भी खास रही। मसलन, प्रदेश के सबसे बडे़ नगर निगम देहरादून में उसके प्रत्याशी को एक लाख से भी ज्यादा वोटों के अंतर से विजय प्राप्त हुई। नगर निगम अल्मोड़ा के चुनाव में पहली बार पार्टी के हाथ विजय लगी। रूड़की नगर निगम के चुनाव में भी पार्टी को पहली बार विजय नसीब हुई।
न सिर्फ, नगर निकाय चुनाव, बल्कि वर्ष के मध्य भाग में जब त्रिस्तरीय पंचायत के चुनाव हुए, तो वह भी भाजपा के आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर पहुंचाने वाले साबित हुए। यू ंतो उत्तराखंड में 13 जिले हैं, लेकिन तकनीकी वजहों से हरिद्वार को छोड़कर बाकी सभी जिलों में चुनाव कराए गए। प्रदेश के 12 जिला पंचायत अध्यक्षों की सीटों में से 11 पर भाजपा का कब्जा रहा। करीब 60 प्रतिशत ब्लाक प्रमुख और 70 प्रतिशत ग्राम प्रधान भाजपा के बने। गांव और शहर के चुनावों में भाजपा की शानदार जीत ने सरकार और संगठन दोनों का मनोबल बढ़ाया। वर्ष 2027 के प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले निकाय और पंचायत चुनाव दोनों में जबरदस्त सफलता ने भाजपा को मनोवैज्ञानिक बढ़त भी दिला दी।
भट्ट और गोदियाल दोनों को फिर से अवसर
-वर्ष 2025 में उत्तराखंड की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों भाजपा औैर कांग्रेस ने अध्यक्ष पद पर अपनेे ऐसे नेताओं को दोबारा बैठा दिया, जो पहले कामकाज संभाल चुके थे। भाजपा ने महेंद्र भट्ट को अध्यक्ष बतौर कार्यकाल पूरा होने के बाद फिर से अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठा दिया। उत्तराखंड गठन के बाद महेंद्र भट्ट पहले ऐसे अध्यक्ष हैं, जिन्हें लगातार दूसरा मौका दिया गया है। कांग्रेस की बात करें, तो गणेश गोदियाल को इस वर्ष दूसरी बार पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि वह लगातार दूसरी बार नहीं चुने गए। वर्ष 2022 में जब विधानसभा चुनाव हुए थे, तब वह ही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे, लेकिन चुनाव में करारी हार के बाद हाईकमान ने उन्हें हटाकर करण माहरा को अध्यक्ष बना दिया था। इस वर्ष की विदाई होने से पहले ही पार्टी ने फिर से एक बार प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी गणेश गोदियाल को सौंप दी।