वन संसाधनों के संरक्षण में वन पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका, कार्यशाला में दिया प्रस्तुतिकरण

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उदंकार न्यूज
नैनीताल/देहरादून।
नैनीताल स्थित गोविंद वल्लभ पंत उच्च प्राणी उद्यान मे गैर वन प्रकाष्ठ एवं वन उपज तथा हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म परियोजना एवं वन पंचायत सशक्तिकरण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता उप निदेशक वन पंचायत कार्यालय वेद प्रकाश किमोठी ने की। उन्होंने संबंधित विषय पर विस्तार से प्रस्तुतिकरण दिया।
कार्यशाला के दौरान अधिकारियों द्वारा प्रतिभागियों को परियोजना के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उप निदेशक वन पंचायत वेद प्रकाश किमोठी ने अवगत कराया गया कि यह एक 10 वर्षीय परियोजना है, जिसके अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 49 वन पंचायतों को शामिल किया गया है, जिनमें से वर्तमान में 2 वन पंचायते नैनीताल जनपद की हैं। साथ ही बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में परियोजना के अंतर्गत 150 वन पंचायतों के कुल 1500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वनीकरण कार्य प्रस्तावित है।
अधिकारियों ने बताया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड में वन पंचायतों के माध्यम से सतत वन प्रबंधन को सुदृढ़ करना, वन संसाधनों का संरक्षण करना तथा स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका विकास के अवसर सृजित करना है।
कार्यशाला में डॉ डीके जोशी द्वारा पंचायती वन नियमावली, 2005 (यथासंशोधित 2024) में उल्लिखित प्रमुख प्रावधानों, नियमों एवं वन पंचायत प्रबंधन समिति के प्रमुख अधिकारों के संबंध में भी प्रतिभागियों को जानकारी दी गई। लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वन पंचायतें स्वयं में समृद्ध एवं आत्मनिर्भर बन सकें तथा स्थानीय संसाधनों का सतत एवं विवेकपूर्ण उपयोग करते हुए दीर्घकालीन विकास की दिशा में अग्रसर हों। डॉ जोशी ने वन पंचायत् नियमवाली पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला. कार्यशाला में ममता चंद, मुकेश व आनंद लाल के साथ नैनीताल जनपद के सरपंचों व वन पंचायत सचिवों ने प्रतिभाग किया.

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