धामी मंत्रिमंडल हुआ पूरा, पांच मंत्रियों की एंट्री से स्थायित्व का मजबूत संदेश

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दीपक फरस्वाण

-आखिरकार धामी सरकार का बहुप्रतीक्षित मंत्रिमण्डल विस्तार चैत्र नवरात्रि के शुभ मौके पर हो ही गया। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने अपनी कैबिनेट में रिक्त पड़े सभी पांच पद एक झटके में भर दिए। मंत्रिमण्डल का विस्तार यह उन लोगों के लिए झटका है जो इसमें हो रही देरी को मुख्यमंत्री पद से धामी की छुट्टी के रूप में देख रहे थे। संभवतया अब उन्हें भी भरोसा हो गया होगा कि भाजपा 2027 का विधानसभा चुनाव धामी के नेतृत्व में मजबूती से लड़ेगी। कैबिनेट का यह विस्तार महज एक औपचारिकता नहीं बल्कि जातीय, क्षेत्रीय और सामाजिक इंजीनियरिंग का मास्टरप्लान है। धामी की खासियत देखिए, उन्होंने कैबिनेट के कुछ पद खाली रखकर चुनाव तक मुख्यमंत्री की कुर्सी सुरक्षित रखने की रवायत को तोड़ा है। वह प्रदेश के पहले एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री है जिनके मंत्रिमण्डल में सभी 12 सदस्य कैबिनेट स्तर के हैं राज्य मंत्री स्तर का एक भी मंत्री नहीं है।

आज हुए मंत्रिमण्डल विस्तार में पांच विधायकों खजान दास (राजपुर), भरत सिंह चौधरी (रुद्रप्रयाग), मदन कौशिक (हरिद्वार), प्रदीप बत्रा (रुड़की) और राम सिंह कैड़ा (भीमताल) को कैबिनेट में शामिल किया गया। इस विस्तार में हरिद्वार जनपद को खासी तवज्जो दी गई, जहां से दो विधायकों मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा को मंत्री बनाया गया है। दरअसल, पिछले विधानसभा चुनाव में हरिद्वार जिले में भाजपा का प्रदर्शन ठीक नहीं रहा था। जिले की 11 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 3 सीट ही पार्टी जीत पाई थी। अब भाजपा चाहती है कि अगले साल 2027 के शुरुआत में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में हरिद्वार से कुंभ के कमल भी खिलता नजर आए। खासतौर पर मदन कौशिक को कैबिनेट में लेकर मुख्यमंत्री धामी ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। पार्टी के भीतर की कशमकश को देखें तों मदन कौशिक विरोधी खेमे के माने जाते थे लेकिन धामी ने उन्हें मंत्री बनाकर खुद के सियासी तौर पर परिपक्व होने का संदेश दिया है। कौशिक को बनाने के और भी फायदे मिले। कौशिक धर्मनगरी हरिद्वार के साथ ही मैदानी जिले से आते हैं। उनके साथ रुडकी के विधायक प्रदीप बत्रा को मंत्रिमण्डल में शामिल करके मुख्यमंत्री पुष्क्र सिंह धामी ने मैदान और पहाड़ को लेकर उत्पन्न किए जा रहे अनावश्यक विवाद पर मिट्टी डालने का काम किया है। अब उन्हें कौशिक के रूप में एक अनुभवी कैबिनेट मंत्री भी मिल गया है जिसकी कमी सदन में पिछले कुछ समय से महसूस की जा रही थी। चमोली और रुद्रप्रयाग से कैबिनेट में प्रतिनिधित्व नहीं था लिहाजा भरत चौधरी को टीम में जगह दी गई है। चमोली जिले के बजाए रुद्रप्रयाग को इसलिए तरजीह दी गई क्योंकि चमोली से महेन्द्र भट्ट पहले से भी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष होने के साथ ही राज्यसभा सांसद भी हैं। चूंकि कैबिनेट की खाली पांच सीटों में से एक सीट कैबिनेट मंत्री चंन्दन राम दास के निधन से रिक्त हुई थी लिहाजा अनुसूचित जाति के विधायक खजान दास की लम्बे समय बाद कैबिनेट में वापसी की गई। खजान दास परिपूर्ण और समझदार नेता माने जाते हैं। भीमताल के विधायक राम सिंह कैड़ा युवा होने के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बेहद विश्वासपात्र है, इसीलिए उन्हें टीम में शामिल किया गया। उन्हें धामी का हनुमान कहा जाता है। कुल मिलाकर धामी मंत्रिमण्डल का यह विस्तार 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को संतुलित करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है।

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