‘सुणा जी . . .लठ्याली हे मेरी घस्यारी’, बडोनी दंपति की ‘घस्यारी ‘ संग चलिए एक संगीतमय सफर पर
विपिन बनियाल
-परिणिता-सुनील बडोनी ने टिहरी में आज से 27 वर्ष पहले एक सपना देखा। ‘घस्यारी’ का सपना। पहाड़ के जीवन में घस्यारी का संघर्ष और उसका परिश्रम बडोनी दंपति के जेहन मेें प्रभावी था। सुनील बडोनी ने कलम उठाई और लिख डाली घस्यारी फिल्म की कहानी। तब इस फिल्म के सफर पर बडोनी दंपति काफी आगे बढ़ गए थे। फिल्म में गीत-संगीत का जिम्मा संतोष खेतवाल को दिया गया। इसके गीत करीब 25 वर्ष पहले रिलीज कर दिए गए, जिसने श्रोताओं पर सुरीला प्रभाव छोड़ा। संतोष खेतवाल ने फिल्म के लिए कुछ गीत तो उस स्तर के रचे, जो स्तर नेगीदा का माना जाता है। नेगीदा के साथ अनुराधा निराला का ‘सुणा जी, हां जी हां बोला जी ‘, इसी श्रेणी का गीत है। नेगीदा का एक और गाना ‘दथुड़ी हाथ मा’ भी संतोष खेतवाल ने बेहतरीन रचा। दो गाने उन्होंने खुद भी गाए। दिवंगत शशि जोशी की आवाज भी फिल्म के गीतों में सुनाई दी। कुल मिलाकर ‘घस्यारी’ के गीत-संगीत ने पूरा माहौल जमा दिया था, लेकिन तब इस फिल्म का निर्माण पूरा नहीं हो पाया।

बडोनी दंपति की जीवटता, कर्मठता और लगन को सैल्यूट, जिसके बलबूते अब ‘घस्यारी’ रिलीज के लिए तैयार है। ‘घस्यारी’ के रूप में बडोनी दंपति का सपना अब बडे़ पर्दे रूपी धरातल पर उतर रहा है। तब से लेकर अब तक बहुत कुछ बदल गया है, मगर घस्यारी का संघर्ष नहीं बदला है। नए संदर्भों में अब बडोनी दंपति घस्यारी की तकलीफ को किस तरह से आवाज देने वाले हैं, यह तब पता चलेगा, जब फिल्म रिलीज होगी। निश्चित तौर पर यह एक चुनौती भी है। एक चुनौती और है। ‘घस्यारी ‘ के गीतों की जो लोकप्रियता है, उसके अनुरूप फिल्म में इनका फिल्मांकन कैसे किया गया है, इस पर भी दर्शकों की नजर रहने वाली है।
बहरहाल, दून में संस्कृति विभाग के प्रेक्षागृह में इस फिल्म के पोस्टर व ट्रेलर को रिलीज कर दिया गया है। यानी अब फिल्म के रिलीज होने का काउंटडाउन शुरू हो गया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी केएस चौहान के साथ फिल्म की पूरी टीम ने इसके पोस्टर को रिलीज किया। इस मौके पर कलाकारों ने अपने अनुभव साझा किए। उनका उत्साह देखते ही बन रहा था। ‘घस्यारी’ अब आपको एक संगीतमय सफर पर अपने साथ ले जाने के लिए तैयार है . . . । तो फिर गुनगुनाते हुए चलते हैं … . ‘लठ्याली हे मेरी घस्यारी।’