ढोली . . .जीत का उल्लास, गंभीर विमर्श और बहुत सारी बातें

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विपिन बनियाल


-दून लाइब्रेरी में यह मौका खास था। नेशनल अवार्ड विजेता उत्तराखंडी गढ़वाली फिल्म ढोली की लगभग पूरी कास्ट यहां मौजूद थी। जाहिर तौर पर जीत का सा उल्लास था। यूनिट के हर छोटे-बडेे़ कलाकार के चेहरे पर गर्वीली मुस्कान थी। चेहरा दमक रहा था। निर्माता सुनील नायक, निर्देशक दिनेश पी भोंसले, कला निर्देशक अतुल विश्नोई, कहानी, गीत व संवाद लेखक डाॅ नंदकिशोर हटवाल, संगीतकार-गायक नरेंद्र सिंह नेगी, नायक मोहित घिल्डियाल इत्यादि इत्यादि। सभी के अपने अनुभव थे, संस्मरण थे। इस मंच पर सभी ने अपने अंदाज में इसे प्रकट किया। ढोली से जुड़ने की कहानी बताई। शूटिंग के किस्से बंया किए और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म का हिस्सा होने की खुशी जाहिर की।
हर वक्ता के संबोधन में एक नाम अनिवार्य रूप से उभरा। यह नाम था निर्देशक दिनेश पी भोंसले का। दिनेश पी भोंसले के निर्देशन कौशल के साथ ही अनुशासनप्रियता, कर्मठता और मिलनसार स्वभाव का जादू हर किसी के सर पर किस कदर चढ़कर बोला है, इस कार्यक्रम में उसकी तस्दीक हुई। निर्माता सतीश नायक फिल्म पर पैसा लगाने के लिए कैसे तैयार हुए, कार्यक्रम में इसका खुलासा भी था, तो निर्देशक दिनेश पी भोंसले के वो अनुभव भी थे, कि किस तरह शुरूआत में वह बमुश्किल पहाड़ चढ़ पाए और बाद में अच्छी खासी गढ़वाली भी बोलने लगे।
फिल्म की कहानी लिखने वाले डाॅ नंदकिशोर हटवाल ने अपनेे मूल नाटक जमनदास ढोली के कुछ ऐसे अंशों का जिक्र किया, जो फिल्म का हिस्सा नहीं हो पाए। फिल्म के संगीतकार व गायक नरेंद्र सिंह नेगी फिल्म से जुड़ने के अनुभव साझा किए। ढोली फिल्म को वास्तविक बनाने में अपना अहम योगदान करने वाले ढोलवादक प्रेम हिंदवाल के संबोधन में उस तकलीफ की शिद्दत से मौैजूदगी थी, जिसे पहाड़ में एक वर्ग वर्षों से झेलता आ रहा है। वो तकलीफ, जो अब ढोली फिल्म में मुखर होकर सामने आई है। उनके भावुक संबोधन ने हर एक को झकझोरा।
राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली फिल्म ढोली का टाइटल साॅंग भी इस कार्यक्रम में रिलीज किया गया। कह सकते हैं कि इस बहाने फिल्म की पहली झलक सामनेे आई है। फिल्म अक्टूबर में रिलीज होने जा रही है। राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली ढोली ने प्रशंसा तो खूब बटोर ली है, थियेटर में खूब दर्शक भी बटोर ले, इसके लिए कोशिश की जा रही है। निर्देशक दिनेश पी भोंसले ने अपनेे संबोधन में उत्तराखंड के कलाकारों की बेहतरीन क्षमता, राज्य सरकार के सहयोगी रवैये और फिल्म इंडस्ट्री के आगे बढ़ने की अपार संभावनाओं पर खुलकर बात की है। पहाड़ के सामाजिक और संवेदनशील विषय पर बनी इस फिल्म से ज्यादा से ज्यादा दर्शक जुडे़, इसके लिए उनके स्तर पर फिल्म को टैक्स फ्री घोषित करने की बात भी उठाई गई है। इस पर शायद ही किसी की असहमति हो।

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