राही ओ राही…. स्वागत स्वागत मेरो पहाड़, कैलाश खेर का उत्तराखंड आने का सुरीला आह्वान

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विपिन बनियाल


-कैलाश खेर की गायकी की रेंज जबरदस्त है। उनके आह्वान दमदार होते हैं। अब एक बार फिर कैलाश खेर ने कहा है-स्वागत, स्वागत मेरो पहाड़। यह डीएफओ डायरी, फायर वारियर्स फिल्म का गाना है, जिसे शीर्षक दिया गया है-राही ओ राही। कैलाश खेर की गायकी जितनी उम्दा है, इस गीत का फिल्मांकन भी उतना ही श्रेष्ठ है। पहाड़, खास तौर पर कुमाऊं क्षेत्र की खूबसूरती को शानदार तरीके से पेश किया गया है। पाश्र्व में चलती कैलाश खेर की आवाज और सामने आते खूबसूरत पहाड़ के नजारे सोने पे सुहागा जैसे हैं।
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के आकाश में कैलाश खेर एक चमकता सितारा है। कैलाश खेर जब संघर्ष के दौर में थे, तो उस कठिन समय में देवभूमि उत्तराखंड ही उनके लिए बड़ा सहारा बनी थी। आध्यात्मिक नगरी ऋषिकेश से ऊर्जा पाकर कैलाश खेर निकले और फिर संगीत की दुनिया में छा गए। वर्ष 2013 की आपदा के बाद जब केदारनाथ पुनर्निर्माण की बात चली और यात्रा के प्रमोेशन पर काम हुआ, तो जय-जय केदारा प्रोजेक्ट के साथ कैलाश खेर सामने आए। इस प्रोजेक्ट के साथ विवाद भी जुड़ा। मनमाने भुगतान को लेकर कैलाश खेर निशाने पर आए और सरकारी सिस्टम पर भी अंगुली उठी, लेकिन शिवभक्ति से जुड़ी उनकी रचना के सिर्फ कला पक्ष की समीक्षा की जाए, तो यह बेहद प्रभावशाली रही थी।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डा रमेश पोखरियाल निशंक की कहानी पर बनी फिल्म मेजर निराला के लिए वर्ष 2018 में कैलाश खेर ने एक गढ़वाली गाना भी गाया-कदगा कमयू मुनाफा, कदगा कदमू घाटा। इसका गीत-संगीत नरेंद्र सिंह नेगी का था। अब कैलाश खेर फिर एक गीत के साथ सामने हैं, जिसमें पहाड़ है। पहाड़ का सौंदर्य है। छोलिया है। पिछोड़ा है। धुन पहाड़ की है। पहाड़ का इतना सुंदर चित्रण है, जो देखते ही बनता है। डीएफओ डायरी, फायर वारियर्स फिल्म के लिए इस गीत को कैलाश खेर की आवाज नसीब होना किसी वरदान से कम नहीं है।
इस फिल्म के लेखक/निर्देशक देहरादून निवासी महेश भट्ट के अनुसार-यह गीत पहले इस फिल्म का हिस्सा नहीं था। फिल्म से जुडे़ लोगों के पास कैलाश खेर का यह गीत पहले से उपलब्ध था, जिसके फिल्म के साथ जुड़ाव की संभावना देखते हुए इस पर काम किया गया। यह गाना पहाड़ के पर्यटन की ब्रांडिंग करता है। फिल्म में यह गीत कुछ छात्राओं पर फिल्माया गया है, जो कि उस स्थान की तलाश में निकलती हैं, जहां पर रवींद्रनाथ टैगौर ने गीतांजलि की रचना की थी। गीत को विनय कोचर ने लिखा है। प्राथमिक धुन भी उन्हीं की बनाई हुई है, लेकिन पहाड़ के खास संदर्भों में अमित वी कुमार ने नए सिरे से इसके संगीत पर काम किया है। महेश भट्ट इस बात से बेहद खुश हैं कि कैलाश खेर की आवाज वाला गीत फिल्म का हिस्सा बना है। कैलाश खेर के इस गीत पर विस्तृत वीडियो आप धुन पहाड़ की यूट्यूब चैनल पर देख सकते हैं।

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