भावनात्मक रैबार है जलमभूमि, जिसके सबक अनमोेल हैं, फिल्म में दम है, भावनाओं का उफान है

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विपिन बनियाल

-उत्तराखंडी सिनेमा में इन दिनों माइग्रेशन और रिवर्स माइग्रेशन की खूब बात हो रही है। हालांकि उत्तराखंडी सिनेमा इस महत्वपूर्ण विषय को पहले भी टच करता रहा है। इस क्रम में वर्ष 1990 में आई रैबार फिल्म का उदाहरण लिया जा सकता है। जलमभूमि फिल्म के शीर्षक से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह फिल्म जड़ों से जुड़ाव की कहानी कहती होगी। फिल्म की कहानी उन्हीं देवी प्रसाद सेमवाल ने लिखी है, जिन्होंने वर्ष 1990 में रैबार की कहानी लिखी थी। तब से अब तक भागीरथी-अलकनंदा में काफी पानी बह चुका है। नए संदर्भों के हिसाब से इस कहानी को बनाने में अभिषेक मैंदोला ने भी सहयोग किया है। यह फिल्म सही अर्थों में के राम नेगी और अभिषेक मैंदोला की है। जिसमें उन्होंने कई-कई अहम जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई है। दोनों ने जमकर पसीना बहाया है और नतीजतन एक भावुक कर देने वाली फिल्म हम सभी के सामने आई है।
फिल्म का निर्देशन के राम नेगी और अभिषेक मैंदोला ने संयुक्त रूप से किया है, जो कि बेहतर है। नए-पुराने कलाकारों से अच्छा काम लिया गया है। के राम नेगी फिल्म के निर्माता भी हैं, तो एक प्रमुख भूमिका में भी नजर आते हैं। वह हर भूमिका में फिट हैं। वहीं, अभिषेक मैंदोला, रंगमंच से निकले ऐसे कलाकार, जो अपनी तमाम तरह की प्रतिभाओं के साथ अब निखरकर सामने आ रहे हैं। इस फिल्म में उन्होंने निर्देशन की जिम्मेदारी के अलावा पटकथा, संवाद लेखक की भूमिका तो की ही है, साथ ही एक प्रमुख किरदार को भी जबरदस्त ढंग से निभाया है।
फिल्म में नए पुराने कलाकारों का एक संतुलन है। फिल्म की कास्टिंग काफी अच्छी है। हर किरदार को प्रतिभा दिखाने के पर्याप्त अवसर मिले हैं, लेकिन अंकिता परिहार, अभिनव सिंह चौहान और नेयो फरस्वाण के किरदार फिल्म में सबसे चमकदार हैं। अंकिता परिहार का किरदार विविधताओं से भरा है और उनकी खुले मन से तारीफ करनी होगी, कि उन्होंने गजब की अदाकारी की है। अभिनव सिंह चौहान के पास फीचर फिल्मों का अनुभव बढ़ता जा रहा है। उनका आत्मविश्वास उन्हें सरल, सहज ढंग से भूमिका निभाने में मदद कर रहा है। नेयो फरस्वाण की बात करें, तो वह तो हर लिहाज से गजब हैं। वीडियो सांग में तो स्टार सरीखा उनका जलवा है, लेकिन अपनी पहली फीचर फिल्म में उन्होंने जिस तरह का काम किया है, वह बताता है कि वह काफी दूर तक जाएंगे।
फिल्म में गीत-संगीत हो, सिनेमेटोग्राफी हो या कोई अन्य पक्ष, सभी ने मिलकर फिल्म के प्रभाव को उभारने में मदद की है। कुल मिलाकर जलमभूमि फिल्म भावनाओं की एक ऐसी नदी है, जिसके साथ आप बहना चाहेंगे। मैने फिल्म की टीम के साथ इंटरव्यू किया है और अपने धुन पहाड़ की यू ट्यूब चैनल के लिए एक वीडियो तैयार किया है। आप इस वीडियो को दिए गए लिंक पर क्लिक कर देख सकते हैं।

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