. . . . .तब बशीर साहब ने कहा था मेरा एकाध शेर तो हर किसी को याद रहता ही है

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विपिन बनियाल
-मेरा एकाध शेर तो हर किसी को याद रहता ही है। बशीर बद्र साहब नेे मुझसे यह बात तब कही थी, जबकि मैने उन्हें बताया था कि उनका एक शेर मुझे बहुत पसंद है। यह शेर मैने उन्हें सुनाया था-कभी कभी तो छलक पड़ती है यूं ही आंखें/उदास होने का कोई सबब नहीं होता। बशीर साहब मुशायरे के एक प्रोग्राम में शिरकत करने देहरादून पहुंचे थे। यह करीब बीस साल पुरानी बात होगी। अमर उजाला में कार्यरत रहते हुए मुझे यह जानकारी हुई थी कि बशीर साहब एक होटल में रूके हुए हैं। अमर उजाला के लिए तब उनका बहुत जबरदस्त इंटरव्यू तो नहीं हो पाया था, लेकिन थोड़ी बहुत बातचीत जरूर हुई थी। मुझे वह अतिशय विनम्र नहीं लगे और पूरी बातचीत के दौरान उनकी धीर-गंभीर शख्सियत से ही मेरा वास्ता हुआ। ईद केे मुबारक मौके पर बशीर बद्र साहब दुनिया से रूखसत कर गए। उनके इंतकाल की खबर अफसोसनाक है। शेरो-शायरी की सामान्य जानकारी रखने वाला शख्स भी महसूस कर सकता है कि आज उसका कितना नुकसान हुआ है। ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें।

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