विदेशी धरती पर एशियाई खेलों की तैयारी में जुटी है पहाड़ की बेटी अंकिता ध्यानी

0


विपिन बनियाल
-अमेरिका के कोलोराडो में इन दिनों पहाड़ की बेटी अंकिता ध्यानी जमकर पसीना बहा रही है। कोच साइमन स्कॉट की देख-रेख में वह एशियाई खेलों की तैयारी में व्यस्त है। जाहिर तौर पर चुनौती बड़ी है। ट्रैक पर अंकिता का मुकाबला दिग्गज धावकों से होना है। मगर उसके हौसले में कमी नहीं है। उसकी आंखों में पदक का सपना पल रहा है। जापान एशियाई खेलों में इस बार वह तीन हजार मीटर स्टीपलचेज के इवेंट में देश के लिए दौडे़गी। यह इवेंट 29 सितंबर को है।
अंकिता ध्यानी की आंखों में पदक का सपना आज का नहीं है। इससे पहले, जब 2022 में पहली बार एशियाई खेलों में वह दौड़ी, तब भी यह सपना था। इसके बाद, 2024 के पेरिस ओलंपिक में भी इस सपने के साथ अंकिता ट्रैक पर दौड़ी थी, लेकिन सफल नहीं हो पाई थी। अब जापान एशियाई खेलों में एक बार फिर वह ट्रैक पर जी-जान लगाने के लिए तैयार है।
कोलोराडो-अमेरिका से फोन पर बातचीत के दौरान अंकिता ध्यानी ने कहा-इस स्तर की अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में पदक जीतना उनका सबसे बड़ा सपना है। अच्छे प्रदर्शन में वह कोई कमी नहीं छोडे़गी। एशियाई खेलों के लिए अंकिता ध्यानी ने इस वर्ष जून माह में क्वालीफाई किया था। उसके बाद से वह कोलोराडो-अमेरिका में तैयारी कर रही है। अंकिता के अनुसार-तैयारी अच्छी चल रही है। मेरा लक्ष्य अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना और देश के लिए पदक जीतना है।
उत्तराखंड के पौड़ी जिले के छोटे से गांव मरूडा से निकली अंकिता ध्यानी की उपलब्धियां कहीं बड़ी है। राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में अंकिता ने कई पदक जीते हैं। यरूशलम मेें आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स में वह पहले स्थान पर रही थी। वह महिलाओं की दो हजार मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा में वर्तमान में राष्ट्रीय रिकार्ड धारक हैं।
अंकिता कहती है-हमारे देश के खिलाड़ियों ने कॉमनवेल्थ गेम्स में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। अब एशियाई खेलों में भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है। अंकिता के प्रदर्शन पर उत्तराखंड की भी निगाहें टिकी होंगी। अंकिता की शिक्षिका रिद्धि सेमवाल भट्ट का कहना है-हमें उम्मीद है, वह बेहतर करेगी।

‘खेल रत्न मेरी लिए बड़ी उपलब्धि’

-उत्तराखंड सरकार ने पिछले दिनों खेल दिवस के मौके पर अंकिता ध्यानी को खेल रत्न प्रदान किया है। हालांकि अमेरिका में होने के कारण वह इस पुरस्कार को लेने नहंी पहुंच पाई। उनके माता-पिता ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। अंकिता कहती हैं-खेल रत्न मिलना मेेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। वह कहती हैं-उत्तराखंड में खेल सुविधाएं धीरे-धीरे बढ़ रही हैं, लेकिन गांव और पहाड़ी क्षेत्रों में अच्छे मैदान, सिंथेटिक ट्रैक, कोच और नियमित प्रतियोगिताएं और बढ़नी चाहिए, ताकि प्रतिभाओं को प्रशिक्षण के लिए बाहर न जाना पडे़।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *