पहाड़ी लोक की गरिमा के साथ, भीना-स्याली के रिश्ते की बात

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विपिन बनियाल

-भीना-स्याली यानी जीजा साली। पहाड़ में जीजा को भीना कहा जाता है। स्याली यानी साली। जमाना चाहे कोई सा रहा हो, उत्तराखंडी लोक संगीत में भीना-साली के गीत खूब गूंजे हैं। पहाड़ के परिवेश, यहां की लोक-परंपरा मेें लिपटे इन गीतों की ताजगी कभी कम नहीं हुई है। ‘ओ भीना कसके जाझूू द्वारहटा ‘ हो या फिर ‘स्याली हे बसंती स्याली, तन की गोरी मन की काली ‘ जैसे गीत आज भी खूब सुने जाते हैं। भीना-स्याली के रिश्तों पर केंद्रित गीत लगातार बन रहे हैं और बहुत अच्छेे सेे इनका प्रस्तुतिकरण हो रहा है। इस क्रम में हालिया रिलीज दो गीतों का जिक्र करना मुनासिब है, जो हर लिहाज से बेहतर हैं।
पहले ‘ हे भानु ‘शीर्षक वाले गीत की बात। इस गीत पर शैलेंद्र पटवाल और विवेक नौटियाल की गहरी छाप है। शैलेंद्र पटवाल एक गंभीर कलाकार हैं और इस गाने में एक्टिंग से लेकर डायरेक्शन तक में उनकी इसी गंभीरता के दर्शन हुए हैं। विवेक नौटियाल का तो कहना ही क्या। अपनी गायिकी, शब्द और संगीत रचना से वह अक्सर प्रभावित करते रहे हैं। इस गीत में भी उन्होंने कमाल का हुनर दिखाया है। बाकी का काम संगीत संयोजन में राकेश भट्ट नेे बखूबी किया है। राकेश भट्ट का नाम अब स्तरीय कार्य के लिए जाना जा रहा है। दिव्या नेगी की अदाकारी और प्रतीक्षा बमराड़ा की गायिकी इस गाने का एक और मजबूत पक्ष है।
दूसरा गीत, ‘भीना सोबना ‘है, जिस दर्शन फरस्वाण और नीलिमा मिश्रा ने गाया है। दर्शन फरस्वाण हर बार अपने गाने के खास अंदाज से दिलों में जगह बनाते जा रहे हैं। स्क्रीन पर अजय सोलंकी और शिवानी भंडारी का काम प्रभावित करता है। गीत संतोष गौर ने लिखा है, जिसका संगीत रामेश्वर गैरौला ने तैयार किया है। दोनोें ही गानों में डीओपी और एटिडर नवि बर्त्वाल हैं। सिनेमेटोग्राफी दोेनों ही गानों में बढ़िया है, लेकिन फिर भी भीना सोबना गीत इस लिहाज से इक्कीस ही साबित होता है। कुल मिलाकर दोनों गानों में हर विभाग में जिस तरह से मेहनत की गई है, उसके सकारात्मक परिणाम दिखाई देते हैं। स्तरीय ढंग से लोक के रिश्तों का बेहतरीन चित्रण इन दोनों गीतों में दिखाई देता है। धुन पहाड़ की यूू ट्यूब चैनल पर संबंधित वीडियो को आप दिए गए लिंक पर क्लिक कर देख सकते हैं।

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